कर लाभ (टैक्स बैनेफिट)

मोहन फाउंडेशन वह पहली गैर-लाभकारी संगठनों में से एक है जो अंग दान की एक परोपकारी प्रणाली के विकास के लिए काम कर रहा हैं। फाउंडेशन का उदेश्य कम-विशेषाधिकार प्राप्त अंग विफलता के रोगियों को ‘जीवन का उपहार’ पाने में मदद करना हैं। मोहन फाउंडेशन द्वारा प्रदान की जाने वाली सभी सेवाएं मुफ्त हैं। हमारा काम मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994 और 2011 के द्वारा निर्देशित है, जहां कोई भी अंग खरीदा या बेचा नहीं जा सकता है। इसलिए, हम अंग दाता परिवार को कुछ भी भुगतान नहीं करते हैं या अंगों के प्राप्तकर्ताओं से कोई मौद्रिक लाभ प्राप्त नहीं करते हैं। हम समुदाय के परोपकार के माध्यम से अपनी गतिविधियों को पूरी तरह से बनाए रखते हैं। हमने जो महत्वपूर्ण काम किया है, उसे पहचानते हुए, हमें परोपकारी लोगों, कॉर्पोरेट दाताओं और ट्रस्टों से समर्थन मिला है।

हमें दान दे कर के आप अनमोल जीवन बचा सकते हैं। आपके दान से रोगियों और उनके परिवारों के जीवन में एक बड़ा फ़र्क आयेगा। अंत चरण की अंग विफलता से पीड़ित कई रोगियों का सहायता करने में हमारी मदद करें। आप मोहन फाउंड़ेशन की एक विशिष्ट या कार्यक्रम के समग्र प्रयासों की सहायता कर सकते हैं और इसके तहत कर-लाभ प्राप्त कर सकते हैं:

  1. धारा 80 जी के तहत 50% कर छूट
  2. पंजीकृत विदेशी निधियों का प्राप्तकर्ता एफ.सी.आर.ए., 1976 के तहत कर छूट
  3. आंतरिक राजस्व सेवा संहिता (अमेरिकी नागरिकों) की धारा 501 (सी) (3) के तहत कर छूट

भारतीय नागरिकों को कर लाभ:

जब आपके पास एक आय होती है जो आपको कराधान के लिए उत्तरदायी बनाती है। तो आईयें मोहन फाउंडेशन को दान दें कर एक नेक काम करें और हमें कई ज़िंदगियों को बचाने में मदद करके, धारा 80 जी के तहत अपनी दान राशि पर 50% कर छूट प्राप्त करें।

विदेशी और अमेरिकी नागरिकों को कर लाभ:

संयुक्त राज्य अमेरिका में दाता जो भारत में अंग दान कार्यक्रम का समर्थन करना चाहते हैं वे दान कर सकते हैं और दान की गई सभी धन राशी का उपयोग भारत में अंग प्रत्यारोपण कार्यक्रम का समर्थन करने के लिए किया जाएंगा। सभी योगदान को धारा 501 (सी) ( 3) आंतरिक राजस्व सेवा संहिता की शर्तों के तहत कर-लाभ मिलेगा।

हमें सरकार द्वारा विदेशी अंशदान विनियमन (एफ.सी.आर.ए) अधिनियम, 1976 के तहत विदेशी अंशदान प्राप्त करने की अनुमति हैं।

कॉर्पोरेट संगठनों को कर लाभ:

हम भारतीय कंपनियों अधिनियम, 2013 के प्रावधानों, वैश्विक प्रथाओं और भारतीय परंपराओं और हाल ही में जारी किए गए खंड 135 के मसौदा नियम और प्रमुख पहलुओं को को ध्यान में रख कर ही सी.एस.आर की अवधारणा की एक सामान्य सहमति बनाने के लिए निरंतर प्रयास करते हैं। हम सी.एस.आर गतिविधियों की रणनीतिक योजना बनाने, क्रियान्वयन और निगरानी में वित्त पोषण संगठनों का मार्गदर्शन करने पर भी ध्यान केंद्रित करते हैं।