सलाहकार सदस्य

 

डॉ. सत्य व्रत शर्मा

डॉ.शर्मा, लगभग 35 वर्षों तक सेवा देने के बाद एनएचएस (नेशनल हेल्थ सर्विस) यूके से सेवानिवृत्त हुए।  अपने कैरियर के आरंभिक वर्षों में वे अंग दान की ओर आकर्षित हुये। उन्होंने पाया कि इंग्लैंड के एशियाई समुदायों में मेजबान समुदाय की तुलना में आवश्यकता 3 गुना अधिक थी और पंजीकरण दर बेहद कम थी। एशियाई समुदायों में जागरूकता बढ़ाने के लिए, उन्होंने 2014 में एक स्वैच्छिक समूह POD (प्रमोशन ऑर्गन डोनेशन) की स्थापना की।

डॉ. शर्मा ने फरवरी 2015 में हाउस ऑफ लॉर्ड्स यूके में मोहन फाउंडेशन और एन.एच.एस.ब्लड एंड ट्रांसप्लांट (NHSBT) के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) कराने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एमओयू का उदेश्य विचारों और लोगों का आदान-प्रदान था। जिस से यूके कीअच्छी कार्य प्रणालीयों को सीख कर उनका उपयोग भारत के अंगदान को आगे बढ़ाने के इरादे से किया गया था। इस से हमें तकनीकी प्रशिक्षण में बहुत सहायता मिली है और भविष्य में इस योजना के तहत तकनीकी प्रशिक्षण में अधिक सहयोग हासिल हो सकेगा।

उन्हें कई सम्मान और पुरस्कार दिए गए हैं:

  • एनएचएस और ओडी (NHS and OD) में उनकी सेवाओं के लिए, एचएम द क्वीन द्वारा 2011 में एमबीई (MBE-पदम श्री की तरह) से सम्मानित किया गया
  • 2013 में BMA की मानद फैलोशिप
  • 2014 में लॉर्ड लेफ्टिनेंट का प्रतिनिधित्व करने के लिए वेस्ट मिडलैंड्स के लिए डिप्टी लेफ्टिनेंट नियुक्त
  • 2014 में WCRC द्वारा “उत्कृष्ट वैश्विक भारतीय पुरस्कार” से सम्मानित किया गया।

 

डॉ.श्रीधर नागैयन

डॉ.श्रीधर नागैयन, कावेरी अस्पताल, चेन्नई में गहन चिकित्सा इकाई(ICU) के वरिष्ठ आई.सी.यू सलाहकार हैं। इससे पहले उन्होंने ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल नॉर्थ स्टैफोर्डशायर में एक महत्वपूर्ण देखभाल (CC) विशेषज्ञ के रूप में काम किया। वे अंग दान, मिडलैंड्स, यू.के. द्वारा संचालित एन.एच.एस रक्त और प्रत्यारोपण (NHBT) के पूर्व  क्षेत्रीय निदेशक थे। इनके क्षेत्र के तहत 28 अस्पताल थे और इस जटिल क्षेत्र में चिकित्सकों को नैदानिक, नैतिक और कानूनी सलाह प्रदान करने का पूरा दायित्व डॉ. श्रीधर का था।

डॉ. श्रीधर ने मोहन फाउंडेशन और एन.एच.एस.ब्लड एंड ट्रांसप्लांट (NHSBT) के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू), की नींव डालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिसे हाउस ऑफ लॉर्ड्स, यूके में फरवरी 2015 में हस्ताक्षरित किया गया था। एमओयू का उदेश्य विचारों और लोगों का आदान-प्रदान था। जिस से यूके की अच्छी कार्य प्रणालीयों को सीख कर उनका उपयोग भारत के अंगदान को आगे बढ़ाने के इरादे से किया गया था।

डॉ. श्रीधर ने  ‘डोनर ऑप्टिमाइज़ेशन’ का एक ऐप, स्मार्ट फोन के लिये विकसित किया है, जो ब्रेन डेथ की पुष्टि के बाद किस तरह से अंग-दान की प्रकिया को सफल रूप से संचालित किया जा सकता हैं, उसके लिये एक त्वरित संदर्भ गाइड के रूप में कार्य करता है। इस का उपयोग व्यापक रूप से गहन देखभाल (ICU) कर्मियों के द्वारा किया जा सकता है, जो संभावित ब्रेन डेड ऑर्गन डोनर के निदान और रखरखाव में लगे हुए हैं। डॉ. श्रीधर ने मस्तिष्क- मृत्यु और अंग दान पर गहन देखभाल (ICU) स्टाफ को प्रशिक्षित करने के लिए मोहन फाउंडेशन टीम के साथ बड़े पैमाने पर काम किया है।

 

डॉ. टी.एस.क्लेअर

डॉ. क्लेअर, पुष्पावती सिंघानिया अस्पताल और अनुसंधान संस्थान (PSRI अस्पताल), के हार्ट संस्थान के चेयरमैन हैं। कार्डियोलॉजी के क्षेत्र में डॉ. क्लेअर ने कई नई पहल की हैं। उन्होंने 2004 में अमृतसर, पंजाब में पहले भारत-पाक हार्ट शिखर सम्मेलन के आयोजन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और इन दोनों देशों के डॉक्टरों को वैज्ञानिक और सामाजिक रूप से एक साथ लाने का प्रयास किया।

डॉ. क्लेअर को चिकित्सा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए भारत के राष्ट्रपति द्वारा 2005 में ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया गया था और 2007 में आई.एम.ए अकादमी ऑफ़ स्पेशलिटीज़ से कई विशिष्ट लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कारों के साथ ‘विशिष्ट चिकित्सा सेवा पुरस्कार’भी प्राप्त हुआ।

 

डॉ.रवि मोहंका

डॉ.रवि मोहंका, मुंबई के ग्लोबल हॉस्पिटल्स में लीवर ट्रांसप्लांट और हेपटो-बायिलरी सर्जरी विभाग के प्रमुख और प्रमुख सर्जन हैं, जो पश्चिमी भारत की एक प्रधान लीवर ट्रांसप्लांट यूनिट है। उन्हें लीवर, पित्ताशय, पित्त नली के कैंसर और लीवर, अग्नाशय, आंतों और बहु-आंत प्रत्यारोपण और सर्जरी (जीवित और मृतक दाताओं) का काफी अनुभव है।

उनके कुछ अग्रणी कार्य:

  • भारत का पहला सफल आंत्र प्रत्यारोपण
  • पश्चिमी भारत का पहला संयुक्त लीवर-किडनी प्रत्यारोपण
  • पश्चिमी भारत का पहला स्वॉप लीवर प्रत्यारोपण
  • पश्चिमी भारत का पहला दोहरी पालि यकृत प्रत्यारोपण
  • पश्चिमी भारत का पहला सहायक (APOLT) यकृत प्रत्यारोपण
  • पश्चिमी भारत का पहला पश्चगामी (नितंब) क्षेत्र यकृत प्रत्यारोपण
  • प्रत्यारोपण के लिए पश्चिमी भारत का पहला अंतर-शहर यकृत परिवहन

डॉ. मोहंका लीवर सर्जरी और प्रत्यारोपण को अधिक सुलभ और सस्ती बनाने के लिए कई सरकारी और ट्रस्ट अस्पतालों से जुड़े हैं। वे भारत में अंग दान, उसके संरक्षण और वितरण के बारे में जागरूकता फैलाने के बारे में बहुत सक्रिय रहे है। उन्होंने अपने इस जुनून को आगे बढ़ाने के लिए हमेशा मोहन फाउंडेशन के साथ मिलकर काम किया है।

 

डॉ. अनिर्बान बोस

डॉ.अनिर्बान बोस, अपस्टेट एन.वाई, रोचेस्टर विश्वविद्यालय में मेडिसिन और नेफ्रोलॉजी के एसोसिएट प्रोफेसर हैं। भारत में मरीजों को किडनी ट्रांसप्लांट में होने वाली अनेक परेशानियों का उन्हें प्रत्यक्ष रूप से अनुभव किया हैं, इसीलिये वे व्यक्तिगत और पेशेवर दोनों दृष्टिकोण से किडनी प्रत्यारोपण में एक लंबे अरसे से जुड़े हुये है।

उन्होंने अपनी तरह की सोच वाले लोगों के साथ मिल कर संयुक्त राज्य अमेरिका में मोहन फाउंडेशन की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और मोहन फाउंडेशन के अंग-दान करने के अभियान को आगे बढ़ाने का प्रयास और मदद की हैं।

 

श्रीमती किम वर्मा मोदी

श्रीमती किम वर्मा मोदी ‘वर्मा मेडिसिन रिसर्च ट्रस्ट’ की अध्यक्ष और प्रबंध ट्रस्टी हैं, जो परेल, मुंबई में ग्लोबल हॉस्पिटल के विकास के पीछे है। ट्रस्ट आर्थिक रूप से विकलांग लोगों को चिकित्सा सहायता प्रदान करता है। श्रीमती वर्मा ने बॉस्टन विश्वविद्यालय से आर्थिक प्रबन्धन और विपणन मार्केटिंग में स्नातक किया, इसके साथ ही उन्होने संयुक्त राष्ट्र से इंटरनेशनल अंडरस्टैंडिंग में डिप्लोमा भी प्राप्त किया हैं। वे कई सामाजिक अभियानों, जैसे बचपन के कैंसर, अंग दान, उपशामक (पैल्लीएटिव) देखभाल, शिक्षा और पशु अधिकारों का समर्थन और मदद करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उनके मार्गदर्शन और सहयोग से ही, फाउंडेशन मुंबई में एक कार्यालय स्थापित करने में सक्षम हो पाया है। वे फाउंडेशन की टीम को समय समय पर सलाह दे कर और उन में जोश भर के उन्हें सक्रिय करती रहती है। महाराष्ट्र में मृतक अंग दान को बढ़ावा देने के जनादेश को आगे बढ़ाने के लिए वे इच्छुक और प्रतिबद्ध है।

 

डॉ. समीरन नंदी

डॉ. समीरन नंदी ने 1996 में सर गंगाराम अस्पताल, नई दिल्ली में सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एंड लीवर प्रत्यारोपण विभाग की स्थापना की। वे कैम्ब्रिज और गाय अस्पताल, लंदन में मेडिकल स्नातक थे। उन्होने गाय, एडेनब्रुक के कैंब्रिज, हेमरस्मिथ और बॉस्टन के मैसाच्युसेट्स जनरल अस्पताल से मेडिसिन और सर्जरी में में प्रशिक्षिण पाया। उन्होंने कैम्ब्रिज, लंदन और हार्वर्ड के विश्वविद्यालयों में अध्ययापन किया है । वे 1975 में भारत आये और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जरी विभाग के प्रोफेसर और प्रमुख के रूप में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(AIMS) से जुड़ गए।

उन्होंने 37 पुस्तकों को लिखा और संपादित किया है, जिसमें द नेशनल मेडिकल जर्नल ऑफ इंडिया, ट्रॉपिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल एथिक्स शामिल हैं और उन्होंने 236 शोध पत्र भी प्रकाशित किए हैं। वे गंगा राम इंस्टीट्यूट फॉर पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च के डीन थे और वर्तमान में सर गंगाराम अस्पताल के न्यासी बोर्ड में हैं। वे ‘करंट मेड़िसिन रिसर्च एंड़ प्रैक्टीस’ के संपादक हैं और प्रो. जुल्फिकार भुट्टा के साथ ‘बीएमजे’ (BMJ) के दक्षिण एशिया के संपादकीय बोर्ड में हैं।

डॉ. नंदी ने मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम 1994 के प्रारूपण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और बाद में भारतीय संसद के दोनों सदनों के माध्यम से पारित होने में मदद की, जिस से भारत में मृतक अंग दान कार्यक्रम को गति मिली। वह अंग दान के बड़े समर्थक हैं और उन्होंने हमेशा फाउंडेशन के काम की सराहना कर बढ़ावा दिया है।

 

डॉ. अवनीश सेठ

डॉ. अवनीश सेठ फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एंड हेपेटोबिलरी साइंसेज और फोर्टिस ऑर्गन रिट्रीवल एंड ट्रांसप्लांट (FORT) के डायरेक्टर हैं।  वे ए.एफ.एम.सी पुणे और पी.जी.आई.एम.ई.आर चंडीगढ़ के पूर्व छात्र हैं और उन्होंने लीवर प्रत्यारोपण (यू.के) और एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (यू.एस.ए) में फैलोशिप किया हैं। उन्होंने 2006 के बाद से उत्तर भारत में अंग दान का बीड़ा उठाया।

डॉ. सेठ ने 2007 में आर्मी हॉस्पिटल (R & R) में आर्मड़ फोरसेस ऑर्गन रीट्रीवल एंड़ ट्रासप्लांट अथॉरिटी (AORTA) की स्थापना की, जो उत्तर भारत में पहला सफल अंग दान कार्यक्रम था और इसके लिये उन्हें 2009 में भारत के राष्ट्रपति द्वारा ‘विशिष्ट सेवा पदक’ से सम्मानित किया गया।

डॉ. सेठ इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर ऑर्गन डोनेशन एंड प्रोक्योरमेंट (ISODP) के सदस्य होने के साथ, वे शीर्ष तकनीकी समिति  ‘राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन’ (NOTTO)  के भी सदस्य हैं। वह पूरे भारत में अंग दान को बढ़ावा देने के  फोर्टिस के ‘मोर टू गिव ’अभियान की अगुवाई कर रहे हैं, जिसे 2016 में देश के लिए सर्वश्रेष्ठ सी.एस.आर पहल से सम्मानित किया गया था।

 

श्री रोहित तोषनीवाल

श्री रोहित तोषनीवाल ने वेन स्टेट यूनिवर्सिटी (यू.एस.ए) से औद्योगिक इंजीनियरिंग में एम.एस  और एस.आर.एम इंजीनियरिंग कॉलेज (चेन्नई) से बी.ई (मैकेनिकल इंजीनियरिंग) की। रोहित तोषनीवाल अपनी परिवारिक कंपनी “तोषनीवाल समूह की कंपनियाँ” जिसे इंस्ट्रूमेंटेशन, वैक्यूम टेक्नोलॉजी और पाउडर प्रोसेसिंग की प्रक्रिया में विशेषज्ञता प्राप्त हैं, के डॉयरेक्टर हैं।

श्री तोषनीवाल भारतीय प्रोडक्शन इंजीनियर की संस्था, राजस्थान कॉस्मो क्लब के सदस्य हैं और उन्होंने उद्यमी संगठन के बोर्ड के सदस्य के रूप में भी कार्य किया हैं। उनके पिता, स्वर्गीय श्री प्रभात तोषनीवाल, मोहन फाउंडेशन के ट्रस्टी थे। परिवार में परोपकार का एक मजबूत इतिहास है और उन्होंने हमेशा अंग दान का समर्थन किया ।

 

श्री बिजय अग्रवाल

श्री बिजय अग्रवाल ‘सलारपुरिया सत्व समूह’ के प्रबंध निदेशक हैं। वे एक दक्ष व्यवसायी है, जिसका स्थावर संपत्ति के निर्माण और विकास कार्य का जुनून वाणिज्यिक लाभ से परे है। वे “फ्यूचरिस्टिक न्यू एरा ऑफ डेवलपमेंट” में और देश के प्रगतिशील विकास में योगदान करना चाहते हैं। सलारपुरिया सत्व समूह  दक्षिण भारत की प्रीमियम रियल एस्टेट कंपनियों में से एक है।

श्री अग्रवाल ने शिक्षा के क्षेत्र में भी कदम रखा है क्योंकि वे वास्तव में बच्चे के सर्वांगीण विकास के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के बारे में अग्रसर हैं। वे ग्रीनवुड हाई के बोर्ड के अध्यक्ष हैं, जो कि बैंगलोर में शाखाओं के साथ भारत के शीर्ष रेटेड शैक्षणिक संस्थानों में से एक है। ग्रीनवुड हाई स्कूल भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के लिए अंतर्राष्ट्रीय पाठ्यक्रम प्रदान करते हैं। स्कूल में 1120 प्रतिभाशाली और प्रेरणादायक शिक्षक और सहायक कर्मचारी हैं। अपने पीछे तीन दशक के अनुभव वाले श्री बिजय अग्रवाल प्रेरणा के स्तोत्र हैं। उन्होने कंपनी का निर्माण “विश्वास” के मजबूत सिद्धांतो पर किया।

 

डॉ. रामराज

डॉ. रामराज एक उपक्रमी या एंटरप्रेन्योर हैं, जो आई.टी, सेल्युलर और इंटरनेट उद्योगों से जुड़े हुये हैं। उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से केमिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक किया है और एस.आर.एम विश्वविद्यालय से पी.एच.डी किया है।

वे ‘कंप्यूटर प्वाइंट’, जो व्यक्तिगत कंप्यूटर और बाह्य उपकरण बेचने वाला  भारत का पहला मल्टी-प्रोडक्ट रिटेल आउटलेट था, से जुड़े हुये थे और बाद में उन्होने भारत की पहली नेटवर्किंग कंपनी माइक्रोलैंड की सह-स्थापना की। वे सिफी के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी थे, इनके नेतृत्व में , यू.एस के NASDAQ  नेशनल मार्केट में सूचीबद्ध होने वाली यह पहली भारतीय इंटरनेट कंपनी बन गई थी। बाद में उन्होंने सिकोइया कैपिटल में एक वरिष्ठ सलाहकार के रूप में कार्य किया और वर्तमान में एलेवेर इक्विटी में भी उसी पद पर हैं। उन्होंने जगतजीत इंडस्ट्रीज, बर्जर पेंट्स और जॉनसन एंड जॉनसन से अपने कैरियर की शुरुआत की थी। डॉ. रामराज कई एन.जी.ओ  बोर्ड में परीमर्श दाता हैं।

यह मोहन फाउंडेशन का सौभाग्य हैं कि डॉ. रामराज हमारे सलाहकार बोर्ड में हैं और हम उनके विशाल अनुभव और विशेषज्ञता से लाभान्वित हैं।

 

श्री ए. के. विश्वनाथन

ए.के. विश्वनाथन (विस़) सी.ओ.एस.एम (COSM) के एक कार्यकारी कोच है। वे मार्शल गोल्डस्मिथ स्टेकहोल्डर्स केंद्रित कोचिंग से प्रमाणित है, और एम.जी इंडिया के 25 कोचों में से एक है। डेलॉइट से एक सेवानिवृत्त साथी के रूप में, उनके पास वैश्विक स्तर पर कई भौगोलिक क्षेत्रों में उच्च प्रदर्शन टीमों के निर्माण और कोचिंग का 35 वर्षों से अधिक का अनुभव है।

विस़ के पास व्यापार, प्रौद्योगिकी और जोखिम अनुभव का एक अनूठा मिश्रण है, जिससे उन्हें संगठनों की प्रौद्योगिकी जोखिम को समझने और निपटने में मदद मिली है, खासकर साइबर स्पेस में। डेलॉइट के एक नेता के रूप में, उन्होंने कई टीमों का निर्माण किया, उन्हें कोचिंग दी और उनका मार्गदर्शन किया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें भारत में डेलॉइट रिस्क एडवाइजरी सर्विसेज के लिए नेशनल टैलेंट पार्टनर नामित किया गया।

 

श्री अरुण श्रॉफ

श्री अरुण श्रॉफ एक उपक्रमी या एंटरप्रेन्योर हैं, जिन्होंने यू.एस.ए और भारत में कई टेक स्टार्टअप स्थापित किए हैं। वे ऐक्सटेंड़. ए.एल (Xtend.AI) के संस्थापक हैं, जो स्वास्थ्य और अन्य डोमेन में वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने के लिए ए.आई का उपयोग करने वाला एक स्टार्टअप हैं। वे मेड इंडिया के सह-संस्थापक हैं, जो कि एक प्रमुख स्वास्थ्य वेबसाइट हैं और फ्रंटप्वाइंट सिस्टम्स के भी संस्थापक  हैं, जो एक वेब समाधान प्रदाता हैं।  वह स्वास्थ्य के लिए ए.आई(AI) के विषय   पर आई.टी, आई.टी.यू /ड़बल्यू.एच.ओ. (ITU / WHO) के  समूह का नेतृत्व करते हैं और संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत की कई स्टार्टअप के और गैर-लाभकारी स्टार्टअप के बोर्डों पर परामर्शदाता भी है।

वह विश्व स्तर पर ए.आई और आई.टी, आई.टी.यू /ड़बल्यू.एच.ओ. और टाय सहित अनेक प्रौद्योगिकी सम्मेलनों में आमंत्रित वक्ता रहे हैं। श्री श्रॉफ ने आई.आई.टी मद्रास से बी.टैक, आई.आई.एम अहमदाबाद से एम.बी.ए, पेन स्टेट यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में एम.एस और स्टैनफोर्ड से ए.आई में सर्टिफिकेशन किया हैं।

श्री श्रॉफ अंग दान और भारत में गरीब और विशेषाधिकार प्राप्त बालिकाओं की शिक्षा सहित कई सामाजिक कार्यों के सक्रिय समर्थक है। वह शुरू से ही मोहन फाउंडेशन के काम का समर्थन कर रहे हैं। वह मोहन यू.एस.ए के बोर्ड में भी हैं और वे वहाँ की गतिविधियों में काफी सक्रिय हैं।