मोहन फाउंडेशन-“मरीजों, चिकित्सकों और जनता के लिए सहायक संस्था

 

मोहन फाउंडेशन, यह एक गैर-सरकारी और गैर-लाभकारी पंजीकृत संस्था है। ‘मोहन’ यह एक परिवर्णी शब्द हैं, इसका पूरा नाम ‘मल्टी ऑर्गन हारवेस्टींग एड नेटवर्क’ हैं।  इस संगठन को डॉ. सुनील श्रॉफ ने चेन्नई में 1997 में अंग दान को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया था। मोहन फाउंडेशन की शुरुआत, समान विचारधारा वाले, चिकित्सा संबंधी और गैर-चिकित्सा पेशेवरों के एक समूह द्वारा की गई थी, जो ट्रांसप्लांटेशन ऑफ़ ह्यूमन ऑर्गन्स एक्ट की पहुँच को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध थे। भारत सरकार ने अंग दान की अवधारणा को व्यापक बनाने और अंगों, विशेष रूप से गुर्दे के वाणिज्य व्यवहार को रोकने के लिए 1994 में यह अधिनियम पारित किया। अब न केवल आंखें दान करना संभव है, बल्कि हृदय, फेफड़े, यकृत, अग्न्याशय, गुर्दे, चमड़ी, ह्ड्डीयाँ और हाथ जैसे अन्य महत्वपूर्ण अंग भी दान कर सकते हैं।

अंग दान (गुर्दो) की तिजारत को रोकने के लिए शुरू की गई यह मुहीम आरंभिक कठिनाईयों का सामना करती हुई आज समाज की एक मुख्य धारा बन गई हैं। एक समय यह था जब अंग दान की चर्चा करना अमान्य बात मानी जाती थी, लेकिन आज यह एक गर्व की बात मानी जाती हैं। इसकी शाखायें चेन्नई, हैदराबाद, दिल्ली-एनसीआर, चंडीगढ़, नागपुर, जयपुर, मुंबई और यू.एस.ए में भी हैं।